इयरफोन से बहरा होने का खतरा
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन की रिपोर्ट बताती है कि इयरफोन पर तेज आवाज में संगीत सुनने के कारण युवाओं में बहरापन बढ़ रहा है।
75 डेसिबल-व्यस्त ट्रैफिक
90 डेसिबल- ट्रेन के गुजरने की
60 डेसिबल- सामान्य बातचीत
115 डेसिबल- एमपी3 (अधिकतम आवाज)
105 डेसिबल की आवाज प्रतिदिन एक घंटा सुनने से
110 डेसिबल की आवाज प्रतिदिन 30 मिनट सुनने से
115 डेसिबल की आवाज प्रतिदिन 15 मिनट सुनने स
रोज एक घंटा भी तेज संगीत खतरनाक
संगीत दिमाग को सुकून देता है लेकिन तेज आवाज में लंबे समय तक संगीत सुनना कानों को क्षति पहुंचाता है। किस व्यक्ति के कान को कितना नुकसान होगा यह ध्वनि की तीव्रता और इसे कितनी देर तक उसने सुना, इस पर तय होता है। तेज ध्वनि इयर ड्रम को पतला कर देती है। आमतौर पर लोगों के सुनने की क्षमता 50 साल की उम्र में प्रभावित होती है लेकिन जो व्यक्ति रोज एक घंटे 85 डेसिबल से अधिक आवाज में संगीत सुनता है तो पांच साल बाद उसे सुनने में तकलीफ होने लगती है।कैसे करें इयरफोन का इस्तेमाल
बाजार में 80 से 115 डेसिबल की अधिकतम फ्रीक्वेंसी वाले इयरफोन होते हैं। अगर 50 फीसदी वॉल्यूम पर संगीत सुन रहे हैं तो कितनी भी देर तक इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। बस, ऑटो या शोरगुल वाली जगहों में लोग इसका वॉल्यूम बढ़ा देते हैं, ऐसा न करें। इयरबड्स के बजाय हेडफोन का इस्तेमाल बेहतर विकल्प है।ऐसे होता है नुकसान
कान में ध्वनि तरंगों के रूप में पहुंचती है। ये तरंगें कैनाल से होती हुई इयरड्रम तक पहुंचती हैं। इससे इयरड्रम वाइव्रेट करने लगता है। यहां हेयर सेल ध्वनि के संदेश को इलेक्ट्रिक पल्स के रूप में दिमाग को भेजती हैं। कान में 15 हजार स्पेशल हेयर सेल होती हैं। तेज आवाज से ये कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। जब तक यह पता चलता है कि हमें सुनने में दिक्कत आ रही है तब तक 30 फीसदी हेयर सेल्स नष्ट हो चुकी होती हैं।किसकी आवाज कितने डेसिबल
30 डेसिबल- फुसफुसाने की आवाज75 डेसिबल-व्यस्त ट्रैफिक
90 डेसिबल- ट्रेन के गुजरने की
60 डेसिबल- सामान्य बातचीत
115 डेसिबल- एमपी3 (अधिकतम आवाज)
कान को क्षति पहुंचेगी..
100 डेसिबल की आवाज में प्रतिदिन दो घंटे संगीत सुनने से105 डेसिबल की आवाज प्रतिदिन एक घंटा सुनने से
110 डेसिबल की आवाज प्रतिदिन 30 मिनट सुनने से
115 डेसिबल की आवाज प्रतिदिन 15 मिनट सुनने स
इयरफोन से बहरा होने का खतरा
Reviewed by Yogesh Kumar
on
8:47 AM
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